Paro Pinaki Movie Review | पारो–पिनाकी की अधूरी प्रेम कहानी

Paro Pinaki Movie Review

Rating: ⭐⭐⭐ (3/5)
Genre: Social Drama, Romance
Duration: 94 Minutes
Certificate: U

Cast: Ishita Singh, Sanjay Bisnoi, Hanuman Soni, Dhananjay Sardesh Pandey

Producers: Ishita Singh, Utkarsh Singh, Sanjay Bisnoi, Pratap Jadoun, Samar Singh

Director: Rudra Jadoun

Music: Britto

A Love Story Lost in Poisonous Sewers | सीवर की जहरीली गैस के बीच दम तोड़ता प्यार

कुछ फिल्में मनोरंजन के लिए बनती हैं और कुछ समाज को आईना दिखाने के लिए। ‘पारो–पिनाकी’ दूसरी श्रेणी की फिल्म है—जहां बॉक्स ऑफिस से ज्यादा ज़रूरी है सच्चाई और संवेदना।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी लीड एक्ट्रेस और निर्माता इशिता सिंह ने अपनी निजी पूंजी लगाकर एक ऐसा विषय चुना, जिसमें मुनाफे का लालच कहीं नज़र नहीं आता। यह फिल्म उन सीवर कर्मियों की जिंदगी पर सवाल उठाती है, जिनकी मौत की खबरें हम अखबार के अंदरूनी पन्नों में पढ़कर अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

Story & Plot 

कहानी मुंबई की एक स्लम बस्ती में रहने वाली मरियम उर्फ पारो (इशिता सिंह) से शुरू होती है, जो अपने अब्बा के साथ सब्ज़ी बेचकर गुज़ारा करती है।
पारो को पास की कॉलोनी में रहने वाले पिनाकी (संजय बिस्नोई) से प्यार हो जाता है, जो सीवर की सफाई का खतरनाक काम करता है।

यह प्यार बेहद मासूम है—इतना कि पारो अपने घर से पिनाकी के लिए खाना बनाकर ले जाती है। लेकिन समाज और लालच इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करते। पारो का अब्बा उसे मानव तस्करी करने वाले गिरोह को बेच देता है और पारो अपने सच्चे प्यार से बिछड़ जाती है।

दूसरी ओर, पिनाकी सब कुछ छोड़कर पारो की तलाश में भटकता रहता है।

क्या पारो और पिनाकी फिर मिल पाते हैं? क्या यह अधूरी प्रेम कहानी कभी मुकम्मल होती है? इन सवालों के जवाब के लिए फिल्म देखनी होगी।

इशिता सिंह ने बिना मेकअप, बिना बनावट अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। उनका अभिनय दर्द, मजबूरी और खामोशी को बखूबी दर्शाता है।

संजय बिस्नोई कुछ दृश्यों में कमजोर ज़रूर लगते हैं, लेकिन अपने किरदार के प्रति उनकी सच्चाई साफ दिखाई देती है।

Movie Trailer: Paro Pinki Ki Kahani

सह कलाकार हनुमान सोनी और धनंजय सरदेश पांडे अपने-अपने हिस्से को मजबूती देते हैं।

लेखक–निर्देशक रुद्र जादौन की तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने सीमित बजट के बावजूद पूरी फिल्म को आउटडोर लोकेशंस पर शूट किया।
फिल्म का ट्रीटमेंट सरल है, लेकिन विषय बेहद गंभीर।

ब्रिटो का संगीत कहानी के मूड के साथ चलता है और भावनाओं को उभारने का काम करता है।

‘पारो–पिनाकी’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज़ है, जिन पर शायद ही कभी सिनेमा रोशनी डालता है। अगर आप सच, समाज और संवेदना से जुड़ी फिल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए है।

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