रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐4/5 स्टार्स
ऋषभ शेट्टी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’आखिरकार रिलीज हो गई है। दर्शकों और क्रिटिक्स की नजर इस फिल्म पर टिकी हुई थी क्योंकि पहली ‘कांतारा’ ने जबरदस्त सफलता हासिल की थी।
फिल्म की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां पिछली फिल्म खत्म हुई थी। यह टकराव है **बांगडा किंग्डम और कांतारा के लोगों** के बीच। राजा की महत्वाकांक्षा और कांतारा की विरासत को बचाने की जंग को विजुअल्स और ड्रामा के साथ दिखाया गया है। हालांकि कहानी का फ्लो कई जगह रुकता है और जटिलता के कारण सभी दर्शक आसानी से कनेक्ट नहीं कर पाते।
पहला हाफ साधारण लगता है लेकिन इंटरवल से पहले का सीक्वेंस शानदार है।
दूसरा हाफ जबरदस्त है और क्लाइमैक्स थिएटर में सीटियां बजाने लायक।
विजुअल्स, ग्राफिक्स और एक्शन स्केल के हिसाब से बेहतरीन हैं। कहानी कई जगह लंबी खिंचती है और नेरेशन डिप होता है।
ऋषभ शेट्टी फिल्म की जान हैं। उनका स्क्रीन प्रेज़ेंस इतना दमदार है कि फिल्म की कमियां छुप जाती हैं। रुक्मिणी वसंत सेकेंड हाफ और क्लाइमैक्स में प्रभावित करती हैं।गुलशन देवैया इस बार उतने असरदार साबित नहीं हुए।
जयराम ने क्लाइमैक्स में शानदार काम किया है।
बी. अजननीश लोकनाथ का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म का बड़ा आकर्षण है। संगीत कई जगह ऊंचा लगता है, लेकिन ड्रामा और एक्शन को और ग्रैंड बना देता है।
‘कांतारा: चैप्टर 1’ एक विजुअली शानदार फिल्म है जिसमें दमदार क्लाइमैक्स और पावरफुल परफॉर्मेंस हैं। हालांकि, कहानी की जटिलता और नेरेशन की कमियों के कारण इसे मास्टरपीस नहीं कहा जा सकता। लेकिन यह फिल्म थिएटर में देखने लायक जरूर है।
