एक माँ और बच्चे का रिश्ता शाश्वत, निस्वार्थ एवं मजबूत होता है और बिना किसी शर्त के प्यार करने पर आधारित होता है। माँ के प्यार और स्नेह की कोई सीमा नहीं होती है, लेकिन वह पेचीदा हो सकता है, खासकर जब बेटा आपके पति की नाजायज़ औलाद हो। और क्या हो अगर किस्मत आपको ऐसे बच्चे के साथ एक ही छत के नीचे रहने पर मजबूर कर दे? यशोदा और कृष्णा की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिन्हें किस्मत एकसाथ लाकर खड़ा कर देती है। इस कहानी में दिखाया…
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