राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर एनआईईपीए ने आयोजित किया 16वां मौलाना आज़ाद मेमोरियल लेक्चर

नई दिल्ली – राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), जो शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है, ने नई दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में 16वां मौलाना आज़ाद मेमोरियल लेक्चर आयोजित किया। इस अवसर पर देशभर के शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शोधकर्ता और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर कुमार सुरेश के स्वागत संबोधन से हुई। एनआईईपीए द्वारा शुरू की गई आज़ाद लेक्चर श्रृंखला का उद्देश्य भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदानों पर विचार करना है।

इस वर्ष का मुख्य व्याख्यान अरविंद आश्रम के ट्रस्टी और प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. डॉ. रमेश बिजलानी ने दिया। उन्होंने “समकालीन शिक्षा और श्री अरविंद के विचार” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए आधुनिक शिक्षा प्रणाली की बदलती चुनौतियों और श्री अरविंद के शैक्षिक दर्शन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

डॉ. बिजलानी ने कहा कि शिक्षा केवल रटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जिज्ञासा, रचनात्मकता और स्पष्ट सोच को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि विद्यार्थी आजीवन सीखने वाले बन सकें। उन्होंने मनोशिक्षा की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि यह आत्मबोध को जागृत करती है, जिससे व्यक्ति के आचरण में नैतिकता और आत्मनियंत्रण का विकास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति, योग और चिंतनशील अभ्यासों को शिक्षा प्रणाली में शामिल करना आवश्यक है।

श्री अरविंद के विचारों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा,

> “शिक्षा का मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह विद्यार्थी की अंतर्निहित श्रेष्ठता को उजागर करने में सहायक हो।”

एनआईईपीए की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी ने कार्यक्रम के महत्व पर बोलते हुए कहा,

> “मौलाना आज़ाद मेमोरियल लेक्चर भारत की समृद्ध शैक्षिक परंपरा और उसके भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। श्री अरविंद जैसे विचारकों के दर्शन को आज के संदर्भ में जोड़ना शिक्षा की नैतिक और बौद्धिक नींव को मजबूत करता है।”

यह आयोजन शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद का मंच बना, जिसमें शिक्षा को समावेशी, प्रगतिशील और मूल्यपरक दिशा देने पर चर्चा हुई।

एनआईईपीए ने इस अवसर पर पुनः अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि वह भारत में शिक्षा नीति, नेतृत्व विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

कार्यक्रम का समापन डॉ. सूर्य नारायण मिश्रा, कुलसचिव, एनआईईपीए द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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