इंडियन प्ले बैक सिंगर ‘शाहिद माल्या’ ने अपने पिता का सपना किया पूरा

इंडियन प्ले बैक सिंगर शाहिद माल्या ने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव, करियर से जुड़ी कई बातें शेयर की

शाहिद माल्या ने कहा कि मैं श्रीगंगानगर, राजस्थान से हूं।पिताजी का नाम सलीम है और संगीत से उनका गहरा प्रेम है, वह मोहम्मद रफी के करीबी रहे, उनके असिस्टेंट भी थे। रफी साहब जब उनकी गायिकी सुनते थे तो उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे, मैं उस वक्त काफी छोटा था, पापा सिंगर बनना चाहते थे लेकिन कई पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते ऐसा हो नहीं पाया, ऐसे में 2006 में जब मैंने भी संगीत की दुनिया में कदम रखने की सोची तो सिर्फ अकेले मैं ही नहीं पूरा परिवार मुम्बई आ गया। उस वक्त मन में एक ही बात थी कि पापा का अधूरा सपना पूरा करना है, मैं किसी भी तरह पापा का सपना पूरा करना चाहता था लेकिन यह सफ़र इतना आसान नहीं था। स्ट्रगल काफी लंबा चला, शुरुआत में कई स्टूडियो के चक्कर काटे लेकिन नाकामी हाथ लगी तब निराशा भी होती थी फिर धीरे-धीरे राहें खुलीं मैंने टीवी सीरियलों के लिए गाने गाए जैसे ‘कसौटी जिंदगी की’, ‘देवी’, ‘पृथ्वीराज चौहान’, ‘साईं बाबा’ आदि में गाता रहा। कुछ समय भजन-कीर्तन और होटलों में भी गाना गाकर गुजारा किया।”

शाहिद ने आगे कहा इस दौरान परिवार का तो भरपूर सहयोग मिला ही लेकिन दोस्तों ने भी खूब साथ दिया। जब भी उदास होता तो उनके सामने रफ़ी साहब के दुखभरे नगमे गाकर अपना मन हल्का कर लेता था। दोस्तों ने कभी मेरे गाने सुनने से इंकार नहीं किया और हमेशा यही कहते थे तू एक दिन बड़ा सिंगर बनेगा।”

एक फिल्म थी ‘किसान’ जो कि मेरे लिए गेमचेंजर साबित हुई। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ, दीया मिर्जा जैसे स्टार्स थे, मुझे कुछ सेकंड्स का आलाप रिकॉर्ड करने के लिए बुलाया गया लेकिन मैंने म्यूजिक डायरेक्टर से मिन्नतें कीं कि अगर वो इजाजत दें तो आलाप के साथ चंद लाइनें भी सीन में डाली जा सकती हैं जिससे मेरा बॉलीवुड में सिंगिंग डेब्यू भी हो जाएगा,उन्होंने ऐसा करने से मना करते हुए कहा कि नहीं यार इतना वक्त नहीं है, गाना कौन लिखेगा, हम जल्द से जल्द इसे पूरा करके देना है तब मैंने उन्हें मनाया कि आप इजाज़त दें तो मैं कुछ लाइनें लिख सकता हूं तो उन्होंने मुझे 10 मिनट का वक्त दिया और कहा ठीक है, 10 मिनट में लिखकर ला सकते हो तो लाओ। मैं 15 मिनट में उनके पास कुछ लाइनें लिखकर पहुंचा और उन्हें सुनाईं। उन्होंने अपनी सीट से खड़े होकर मुझे गले लगा लिया और बोल पड़े-अरे यार तुम कहां थे और इस तरह मेरा फ़िल्मी सफर शुरू हुआ।इसके बाद शाहिद की फिल्म ‘मौसम’ में रब्बा मैं तो मर गया गाना गाया जो कि हिट साबित हुआ। इस गाने के लिए मुझे पंकज कपूर से भी तारीफ मिली थी।उन्होंने भी गाना सुनकर मुझे गले लगा लिया था।”

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