भारतीय टेलीविजन के सबसे वर्सेटाइल अभिनेताओं में से एक, आसिफ शेख, अपनी सहज और प्रभावशाली एकिं्टग से लाखों दिल जीत चुके हैं। एण्डटीवी के शो ‘ *भाबीजी घर पर हैं‘ में विभूति नारायण मिश्रा के रूप में मशहूर आसिफ ने अलग-अलग किरदारों में आसानी से ढलने और अपने चार्म के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। बीते सालों में उन्होंने 350 से ज्यादा किरदार निभाए, जिनमें कई कई महिला पात्र भी शामिल हैं। यह एक ऐसा चुनौतीपूर्ण काम है जो कई अभिनेताओं के लिए मुश्किल हो सकता है। लेकिन आसिफ का फोकस हमेशा कला और क्राफ्ट पर रहा, जेंडर पर नहीं। हाल ही में उन्होंने अपने अनुभव, विभिन्न भूमिकाओं के लिए की गई तैयारी और हर किरदार को जीवंत बनाने के तरीके पर खुलकर बात की। अपने किरदारों के बारे में बात करते हुए, आसिफ शेख , ऊर्फ विभूति नारायण मिश्रा, कहते हैं, _“जब ‘भाबीजी घर पर हैं’ शुरू हुआ, तब मेरे किरदारों के लिए काफी रिसर्च और तैयारी की गई। धीरे-धीरे टीम ने मेरे लिए अलग-अलग किरदार और स्टाइल़ डिजाइन किए, और मुझे दर्शकों का खूब प्यार मिला। मैं अपने डायरेक्टर्स और राइटर्स का आभारी हूँ, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और ये मौके दिए। अब तक मैंने 350 से ज्यादा किरदार निभाए हैं, जिनमें से 35 से अधिक महिला की भूमिकायें थीं, जिनकी उम्र 21 से 80 साल के बीच थी। ऐसे किरदार निभाने के लिए मेरा पहला कदम हमेशा यह देखना होता है कि कौन-कौन से बदलाव किए जा सकते हैं और उनका असर कैसा होगा। टीम की मदद से हम रिसर्च करते हैं, संदर्भ लेते हैं और कॉस्ट्यूम और मेकअप से पहले स्केच तैयार करते हैं। लुक सेट होने के बाद हम भाषा, रुख और बॉडी लैंग्वेज तय करते हैं। फिर मैं उस स्थिति में खुद को डालकर परफॉर्म करता हूँ। यही मेरा तरीका है, और मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूँ कि मुझे इतनी विविधता वाले किरदारों को जीवंत करने का मौका मिला।”_
अपने अनुभव साझा करते हुए, आसिफ शेख कहते हैं, _“मेरे लिए एक किरदार सिर्फ एक किरदार है। चाहे वह पुरुष हो या महिला, इससे फर्क नहीं पड़ता; बल्कि आप उसे कितनी सच्चाई और प्रामाणिकता के साथ निभाते हैं- वो ज्यादा महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि यह जेंडर का नहीं, क्राफ्ट का खेल है। आसिफ ने आगे बताया, “फिर भी, महिला किरदार निभाना अधिक मेहनत का काम है। कॉस्ट्यूम से लेकर मेकअप तक, पूरे ट्रांसफॉर्मेशन में कई घंटों का समय लग सकता है। मुझे याद है कि हमारे एक लोकप्रिय ट्रैक में तैयार होने में करीब दो घंटे पच्चीस मिनट लगे थे। ऐसे गेट-अप्स के लिए धैर्य और समर्पण की जरूरत होती है, खासकर जब शूट कई दिनों तक चलता है। लेकिन मुझे यह करना पसंद है।”_
