Rating: ⭐⭐⭐½ (3.5/5)
कलाकार: सोनाक्षी सिन्हा, जहीर इकबाल, अंकित गुप्ता, शर्लिन सेठ, जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य
लेखक एवं निर्देशक: करण रावल
प्यार की कहानियां तो बॉलीवुड में बहुत देखने को मिलती हैं, लेकिन जब प्यार के साथ रहस्य और जुनून भी जुड़ जाए, तो कहानी थोड़ी अलग हो जाती है। सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ भी कुछ ऐसी ही कहानी लेकर आई है।
फिल्म में प्यार है, भावनाएं हैं और कुछ ऐसे सवाल भी हैं, जो सोचने पर मजबूर करते हैं। क्या किसी से प्यार करने का मतलब उस पर अपना हक जमाना है? और अगर प्यार जुनून बन जाए, तो क्या हो सकता है?
फिल्म की सबसे अच्छी बात इसका अलग विषय और सोनाक्षी सिन्हा का अभिनय है। हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी और बेहतर हो सकती थी।
कहानी में क्या है खास?
फिल्म की कहानी किरण (सोनाक्षी सिन्हा) और समर (जहीर इकबाल) की है। किरण एक लेखिका है। उसकी जिंदगी में एक रहस्यमयी फोन कॉल के जरिए समर आता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों एक ही समय में नहीं, बल्कि अलग-अलग सालों में जी रहे हैं। किरण साल 2016 में है, जबकि समर साल 2026 में।
फोन पर शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे दोनों को एक-दूसरे के करीब ले आती है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, समर का प्यार जुनून में बदलने लगता है। इसके बाद कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाते हैं।
फिल्म का यह आइडिया अच्छा है कि एक फोन दो अलग-अलग समय में जी रहे लोगों को जोड़ सकता है। लेकिन कहानी सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रहती। यह भी दिखाती है कि प्यार और किसी को अपने हिसाब से चलाने की जिद में बहुत फर्क होता है।
सोनाक्षी सिन्हा ने फिर जीता दिल
फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा का काम अच्छा है। उनके किरदार को कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कहीं वह आत्मविश्वास से भरी नजर आती हैं, तो कहीं उलझन और डर में दिखाई देती हैं।
सोनाक्षी अपने चेहरे के भाव और आंखों से भी किरदार की भावनाएं दिखाने की कोशिश करती हैं। उनकी मौजूदगी फिल्म को मजबूत बनाती है।
मेरे हिसाब से फिल्म देखने की एक बड़ी वजह सोनाक्षी की एक्टिंग है। उन्होंने किरण के किरदार को अच्छे तरीके से निभाया है।
जहीर इकबाल का काम कैसा है?
जहीर इकबाल ने समर का किरदार निभाया है। उनका किरदार शुरुआत में रोमांटिक लगता है, लेकिन धीरे-धीरे उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है।
एक ऐसे इंसान का किरदार निभाना आसान नहीं होता, जिसके प्यार में धीरे-धीरे जुनून और जिद दिखाई देने लगे। जहीर ने इस भूमिका को निभाने की अच्छी कोशिश की है।
सोनाक्षी और जहीर की जोड़ी भी फिल्म में अच्छी लगती है। दोनों की केमिस्ट्री कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है।
बाकी कलाकारों ने कैसा काम किया?
अंकित गुप्ता ने किरण के पति की भूमिका निभाई है और अपनी भूमिका ठीक तरह से निभाई है। शर्लिन सेठ, जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।
जरीना वहाब जैसे अनुभवी कलाकार की मौजूदगी अच्छी लगती है। बाकी कलाकार भी कहानी को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देते हैं।
निर्देशन और कहानी में कितनी दम है?
निर्देशक करण रावल ने एक अलग तरह की प्रेम कहानी पेश करने की कोशिश की है। दो अलग-अलग समय में रहने वाले लोगों को एक फोन के जरिए जोड़ने का विचार दिलचस्प है।
फिल्म की शुरुआत उत्सुकता पैदा करती है और मन में सवाल उठने लगते हैं कि आखिर दोनों के बीच यह रिश्ता किस दिशा में जाएगा।
हालांकि, कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी लग सकती है। पटकथा को थोड़ा और कसा हुआ रखा जाता, तो फिल्म का असर और बेहतर हो सकता था।
फिर भी, फिल्म का विषय इसे आम प्रेम कहानियों से थोड़ा अलग बनाता है।
आखिर फिल्म देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आपको रोमांटिक फिल्मों के साथ रहस्य और थ्रिलर पसंद हैं, तो ‘तू है मेरी किरण’ आपको पसंद आ सकती है।
फिल्म की कहानी में कुछ नया करने की कोशिश की गई है। सोनाक्षी सिन्हा का अभिनय अच्छा है और जहीर इकबाल के किरदार में भी दिलचस्पी बनी रहती है।
हां, अगर आप बहुत तेज रफ्तार कहानी और हर मोड़ पर जबरदस्त रोमांच की उम्मीद कर रहे हैं, तो कुछ हिस्से आपको थोड़े कमजोर लग सकते हैं।
कुल मिलाकर, ‘तू है मेरी किरण’ प्यार, जुनून और रहस्य को मिलाकर बनाई गई एक ठीक-ठाक फिल्म है। सोनाक्षी सिन्हा का अभिनय इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। कहानी में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन अलग तरह की रोमांटिक थ्रिलर देखने वालों को यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
मेरी रेटिंग: 3.5/5 स्टार।
