रेटिंग: (3.5 /5)
लेखक: मूवी टॉकीज़ टीम
कलाकार: आमिर खान, जेनेलिया डिसूज़ा, गुरपाल सिंह, डॉली आहलूवालिया
निर्देशक: आर. एस. प्रसन्ना
अवधि: लगभग 140 मिनट
शैली: स्पोर्ट्स कॉमेडी-ड्रामा
‘सितारे ज़मीन पर’ आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म है जिसे एक “स्पिरिचुअल सीक्वल” की तरह तारे ज़मीन पर से जोड़ा गया है। लेकिन फिल्म खुद भी यह मानती है कि वह आंसू नहीं, हंसी लाने आई है।
फिल्म की कहानी गुलशन (आमिर खान) की है, जो एक घमंडी और असंवेदनशील बास्केटबॉल कोच है। एक सड़क विवाद के बाद कोर्ट उसे तीन महीने की कम्युनिटी सर्विस की सज़ा देता है, जिसमें उसे एक विशेष टीम को ट्रेनिंग देनी होती है — एक ऐसी टीम जिसमें सभी खिलाड़ी बौद्धिक रूप से दिव्यांग हैं।
पहले यह उसे सज़ा लगती है, लेकिन धीरे-धीरे ये सितारे उसकी सोच, जीवन और आत्मा को छूने लगते हैं। कहानी को देखकर कोई भी दर्शक कह सकता है — यह सफर सिर्फ खिलाड़ियों का नहीं, कोच का भी है।
फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा इसकी विशेष टीम “सितारे” है। इन कलाकारों की सादगी, हास्य भावना और अभिनय की स्वाभाविकता फिल्म को जीवंत बना देती है।
गुरपाल सिंह अपने डायलॉग “हमारी किस्मत जो है ना, वो हथेली पे नहीं, क्रोमोसोम पे बनके आती है” के साथ दिलों में उतर जाते हैं।
आमिर खान को लंबे समय बाद कॉमिक स्पेस में देखना नया अनुभव है। वे अपने किरदार को भरपूर एनेर्जी के साथ निभाते हैं, हालांकि कहीं-कहीं ओवरएक्टिंग का आभास होता है।
फिल्म की कॉमेडी कई बार ज़ोरदार ठहाके लगवाती है — और यहीं इसकी जान बसती है।
जहाँ तारे ज़मीन पर दिल की गहराई तक छूने वाला अनुभव था, वहीं सितारे ज़मीन पर में वो भावनात्मक गूंज नदारद है।
निर्देशक आर. एस. प्रसन्ना ने एक सकारात्मक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विषय को उठाया, लेकिन फिल्म हास्य और गंभीरता के बीच झूलती रह जाती है।
जेनेलिया डिसूज़ा की वापसी प्रभाव नहीं छोड़ पाई। उनका अभिनय बेमेल और संवाद अदायगी असंतुलित रही।
संगीत भी फिल्म की बड़ी कमज़ोरी है। तारे ज़मीन पर का संगीत आज भी ज़ेहन में बसा है, लेकिन सितारे…का कोई गीत याद नहीं रह पाता।
‘सितारे ज़मीन पर’ एक नेक सोच और सच्चे इरादों वाली फिल्म है। यह समाज के उस तबके को दिखाती है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन जिसने खुद को अपनी सीमाओं में ही संपूर्ण बना लिया है।
हालांकि फिल्म पूरी तरह से भावनात्मक असर नहीं छोड़ पाती, लेकिन ‘टीम सितारे’ की सादगी और ह्यूमर इसे देखने लायक बना देती है। यह फिल्म आपको रुलाएगी नहीं, लेकिन मुस्कुराएगी जरूर।
