दूसरी माँ’ के एक्टर आरजे मोहित के पास है 90 साल पुराना एक रेडियो!

रेडियो संचार का एक ऐसा पारंपरिक रूप है, जिसका हमारे आधुनिक और तेज गति वाले डिजिटल युग में भी काफी महत्व है। इसका अनूठा आकर्षण अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ता है। रेडियो का असर लंबे समय तक अगर किसी पर वाकई में पड़ा है, तो वह हैं मोहित शर्मा, जोकि एक प्रतिभाशाली रेडियो होस्ट और एक्टर हैं और जिन्हें एण्डटीवी के शो ‘दूसरी माँ‘ में अपने अभिनय के लिये शोहरत मिली है। इस माध्यम के साथ आरजे मोहित का गहरा लगाव किसी सीमा से नहीं बंधा है, क्योंकि उनके पास एक शानदार रत्न, यानि 90 साल पुराना एक रेडियो है। उनके लिये इस पुराने रेडियो का महत्व सिर्फ टेक्नोलॉजी वाली एक पुरानी चीज होने से कहीं बढ़कर है; यह उन्हें आधुनिकता की आपा-धापी के बीच आराम और तरोताजा होने का मौका देता है। रेडियो पर सदाबहार धुनों और जादुई आवाजों में खोकर उन्हें शांति और सुकून मिलता है।

रेडियो के लिये अपने प्यार के बारे में बताते हुये मोहित ने कहा, ‘‘रेडियो का मेरी जिन्दगी में बड़ा महत्व है और यह मेरी परवरिश के सालों में मेरा वफादार साथी रहा है। रेडियो के लिये मेरा लगाव टीनेज में सामने आया, जब मैं बॉलीवुड के एक गाने से रोमांचित हुआ था, जिसमें प्यार और देशभक्ति थी। दोपहर के फिल्मी गानों के अनुरोधों और देर रात के प्रसारणों ने कई बार मेरी माँ को जगाया और वह इस बात से परेशान थीं कि मैं पढ़ाई से ज्यादा रेडियो पर ध्यान दे रहा हूँ (हंसते हैं)। रेडियो के लिये मेरी लगन ने ही आखिरकार मुझे आरजे के तौर पर कॅरियर बनाने के लिये प्रेरित किया। गुजरते वक्त के साथ जिन्दगी की मांगों को प्राथमिकता मिली और मैं पूरी तरह से अपने काम में लग गया। हालांकि लॉकडाउन ने मुझे अपने बचपन की यादों को जीने का मौका दिया और मैंने 90 साल पुराना एक शानदार विंटेज रेडियो लिया। यह मेरे सबसे समझदारी से भरे फैसलों में से एक था। यह मेरे एक दोस्त को कहीं दिखा था और जब मैंने इसे देखा, तब मुझे तुरंत लगाव हो गया और मैंने बिना किसी संकोच के इसे खरीद लिया। रेडियो को चालू करने पर लगा कि मानो समय की एक असली यात्रा शुरू हुई है, यह यात्रा उस समय की है, जब रेडियो रखने के लिये लाइसेंस लेना पड़ता था। आज की स्थिति बिलकुल विपरीत है, आप कहीं से भी, वर्चुअल तरीके से अपनी कार या स्मार्टफोन पर रेडियो सुन सकते हैं। उस बीते जमाने की भव्यता और शिल्पकारी मेरे भीतर गहराई तक उतर गई और मैंने इसे अपने घर के एक महत्वपूर्ण कोने में सावधानी से रख दिया। रेडियो सुनना अब खाली वक्त में मनोरंजन करना और दिलोदिमाग को सुकून पहुंचाने जैसा लगता है। मेरी भावनात्मक स्थिति, खुशी या गम से इतर मुझे इसकी मधुर धुनों में सुख मिलता है और मैं अपने सबसे पसंदीदा गाने सुनता हूँ। अच्छी बात यह है कि इतना पुराना होने के बावजूद इस रेडियो के स्पीकर दमदार हैं, जोकि इसके रख-रखाव में मेरे द्वारा बरती जाने वाली सावधानी दिखाते हैं। मेरी प्लेलिस्ट में पुराने गानों का एक संग्रह है। मेरा मानना है कि पुराने समय के इस रत्न पर अपनी पसंदीदा मेलोडीज सुनते हुए अनगिनत लोग भावनाओं के संपूर्ण विस्तार से गुजरे होंगे। यह रेडियो बैटरी से चलता है और इसे हाथ से भी घुमाया जा सकता है, जिसमें बिजली की जरूरत नहीं होती है, इसलिये मेरी नजरों में इसका महत्व बढ़ जाता है। इस रेडियो से मुझे इतना लगाव है कि मैं किसी और को इसे छूने भी नहीं देता हूँ। कुछ लोगों को रेडियो संचार का एक गायब हो रहा माध्यम लग सकता है, लेकिन मेरे लिये यह एक प्यारी-सी चीज है, जो मनोरंजन और इंफोटेनमेंट, दोनों का खजाना है। इसके सदाबहार आकर्षण और थेरैपी उपचार देने की ताकत ने इसे मेरे लिये वह बना दिया है, जिसकी जगह कोई और नहीं ले सकता।’’

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