‘जिंदगी में हम कई चीजों से विदाई लेते हैं और यह विदाई वाकई में तकलीफदेह है’सोनी सब के ‘तेरा यार हूं मैं’ के खत्‍म होने पर सायंतनी घोष ने कही यह बात

सोनी सब के ‘तेरा यार हूं मैं’ को एक अनूठे शो के रूप में जाना जाता है। यह शो अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और एक सुनहरे सफर के बाद समाप्ति की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस शो ने 350 से भी ज्‍यादा एपिसोड्स का सफर पूरा किया है। इस शो की कहानी एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां लीड किरदारों राजीव बंसल (सुदीप साहिर) और दलजीत बग्‍गा (सायंतनी घोष) को यह फैसला करना ही होगा कि वे अपने रिलेशनलशिप को बनाये रखना चाहते हैं या हमेशा के लिये एक-दूसरे की जिंदगी से दूर जाना चाहते हैं। इस शो को शुरूआत से ही दर्शकों का भरपूर प्‍यार और तारीफ मिली है और इसका एक प्रमुख कारण है इसकी अनूठी कहानी, जिसमें प्रोग्रेसिव पैरेंटल रिलेशनशिप, रिमैरिज और जिंदगी में आगे बढ़ने जैसे बेहद संवेदनशील विषयों पर रौशनी डाली गई।

शो के अंतिम सफर में दलजीत अपनी जिंदगी के सबसे बड़े दोराहे पर खड़ी होगी, जहां उसे यह निर्णय लेना ही होगा कि क्‍या वह अपने अतीत में वापस जाना चाहती है या अपने वर्तमान के साथ आगे बढ़ेगी। उसने अपनी किस्‍मत के साथ जंग छेड़ दी है। उसका कहना है कि वह अपने किसी भी पति या अपनी ‘किस्‍मत’ को उसके भविष्‍य का फैसला नहीं करने देगी और अपनी जिंदगी का फैसला खुद करेगी। इस शो में दैनिक जीवन के बेहद वास्‍तविक चित्रण को दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि हमें कुछ कठोर, असुखद फैसले लेने के लिये मजबूर होना पड़ता है। इस शो की समाप्ति प्रेम की परीक्षा और बुरे विचारों पर अच्‍छे इरादों की जीत के साथ हो रही है।

सुदीप साहिर ने अपने सफर पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुये कहा, ”’किसी को अलविदा कहना हमेशा ही मुश्किल होता है, लेकिन यह भी सच है कि किसी का अंत किसी दूसरे की नई शुरूआत होती है। मैं राजीव के किरदार, उसकी सादगी को वाकई में मिस करूंगा। उसकी दृढ़ इच्‍छा शक्ति मुझे लाजवाब कर देती है और वह वाकई में मुझे प्रेरित करता है। मैं अपने साथी कलाकारों और तकनीशियनों को मिस करूंगा, जिनके बिना यह सफर कभी भी इतना शानदार नहीं हो सकता था। मैं इस बात से उदास नहीं हूं कि यह शो खत्‍म हो गया है, बल्कि हमने जो पल साथ में बिताये हैं, वह हमारे लिये मायने रखते हैं। हम पर्दे के पीछे भी एक असली परिवार की तरह थे और शो के आखिरी पड़ाव पर आने के बावजूद मेरे लिये यह परिवार महत्‍वपूर्ण है। इस शो की कहानी वाकई में अनूठी थी, जिसमें हास्‍य के साथ किरदारों की भावनाओं को भी दिखाया गया। यह एक प्राइम टाइम का शो था और मैं चैनल और राइटर्स का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्‍होंने राजीव का किरदार निभाने के लिये मुझ पर भरोसा किया। मुझे उम्‍मीद है कि मैंने इस किरदार के साथ न्‍याय किया है और मैं शो का एक पीस अपने साथ लेकर जा रहा हूं, ताकि इसकी विरासत हमेशा जीवंत बनी रहे।”

शो में अपने सफर के बारे में बताते हुये सायंतनी ने कहा, ”इस समय मेरे दिल में क्‍या चल रहा है, उसे मैं शब्‍दों में बयां नहीं कर पाऊंगी। जिंदगी में कई चीजों से विदाई लेनी होती है और यह विदाई वाकई दु:खदाई है। इस शो ने मेरी कामयाबी में एक बड़ी भूमिका निभाई है और मैं वाकई में दलजीत के किरदार को मिस करूंगी, क्‍योंकि मैं इस किरदार से बेहद भावनात्‍मक रूप से जुड़ गई थी। मैं वाकई उसकी सराहना करती हूं, क्‍योंकि वह बहुत मजबूत इरादों वाली और बहादुर है। यह एक खट्टा-मीठा पल है , क्‍योंकि पिछले दो सालों में दर्शकों ने दलजीत को बहुत प्‍यार किया है और अब जबकि शो खत्‍म हो रहा है, मुझे अंदर से कुछ खालीपन सा महसूस हो रहा है। मैं अपनी टीम का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी और उनकी सराहना करूंगी क्‍योंकि उनके बिना यह सफर इतना संतोषप्रद नहीं होता। मुझे सेट पर जाने और अपने किरदार के लिये तैयार होनेकी कमी वाकई में खलेगी, लेकिन जैसा कि मैं कह चुकी हूं कि अच्‍छी चीजों का भी अंत एक दिन हो ही जाता है। मैं अपने दर्शकों को धन्‍यवाद देना चाहूंगी, जिन्‍होंने हमारा इतना साथ दिया।”

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