गुरू पूर्णिमा पर एण्डटीवी के कलाकारों ने अपने गुरूओं के प्रति आभार जताया

गुरू पूर्णिमा का दिन सारे गुरूओं को समर्पित होता है। गुरू वह होता है, जो हमारा शिक्षक, संरक्षक या हमें परामर्श देने वाला होता है। गुरू हमारा मार्गदर्शन करता है, हमें प्रेरणा देता है और हमारे भीतर मूल्यों और ज्ञान के बीज बोता है। ऐसे गुरूओं के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए, एण्डटीवी के कलाकार उन गुरूओं के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया है और उनका जीवन बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह कलाकार हैं साची तिवारी (सुमति, ‘बाल शिव’), चारूल मलिक (रुसा, ‘हप्पू की उलटन पलटन’) और रोहिताश्व गौड़ (मनमोहन तिवारी, ‘भाबीजी घर पर हैं’)।

एण्डटीवी के बाल शिव की सुमति, यानि साची तिवारी ने कहा, ‘‘गुरू ब्रह्मा, गुरू विष्णु, गुरू देवो महेश्वरा’- यह लाइन हमारी जिन्दगी में गुरू या शिक्षक के मायने समझाती है। मेरे स्कूल में मेरी ड्रामा टीचर ने डाउट होने पर मुझे हमेशा गाइड किया। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मेरे सबसे अच्छे रूप को बाहर निकाला। आज अगर मैं स्क्रीन पर परफाॅर्म कर पा रही हूँ, तो केवल उन्हीं के कारण और मैं हमेशा उनका धन्यवाद करूंगी। ऐसा वक्त भी था, जब मुझमें आत्मविश्वास नहीं था, लेकिन उन्होंने मेरा मनोबल बढ़ाया, अपनी स्किल्स निखारने में मेरी मदद की और कोशिश करते रहने के लिये कहा। मैंने एक्टिंग के मामले में जो भी कुछ सीखा है, उनके जरिये ही सीखा है। उन्होंने मुझे कला के माध्यम से खुद को जाहिर करना सिखाया। मैं गुरू पूर्णिमा पर उन्हें एक गुलाब भेजकर अपना प्यार और आभार जताती हूँ और वह हमेशा कहती हैं कि उनके लिये मेरी गुरू दक्षिणा है कड़ी मेहनत, सफलता और आगे बढ़ते रहना।’’

एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की रुसा, यानि चारूल मलिक ने कहा, ‘‘मेरी माँ मेरी गुरू हैं। उन्होंने मेरी जिन्दगी को ढाला है और मैं उन्हें जितना थैंक्यू कहूं, कम है। वह आॅल-राउंडर रही हैंः हिन्दी की एक अच्छी प्रोफेसर, सिंगर और डांसर। उनकी अलग ही चमक थी और उनकी कभी हार न मानने वाली सोच के कारण मैं आज इस मुकाम पर हूँ। यह सोच उन्हें मेरे नानाजी से मिली थी, जो एक आईएएस आॅफिसर थे। मेरी माँ ने मुझे सबकुछ सिखाया, मुझे दिशा दी और जीवन का अनुभव लेने लायक बनाया। उन्होंने जर्नलिज्म, एंकरिंग और एक्टिंग के मेरे सफर में हमेशा मेरा साथ दिया। वह हमेशा कहती थीं, ‘जिन्दगी में हर संभावना के लिये तैयार रहना चाहिये; सबसे बुरा ‘ना’ सुनना होगा, लेकिन आप कोशिश तो करेंगे’। उन्होंने मुझे जिन्दगी में आगे बढ़ते रहने और कभी न रूकने की प्रेरणा भी दी। जिन्दगी में कभी संतुष्ट होकर नहीं बैठना चाहिये।’’

एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में मनमोहन तिवारी की भूमिका निभा रहे रोहिताश्व गौड़ ने कहा, ‘गुरू पूर्णिमा के मौके पर मैं जाने-माने फिल्ममेकर और नाटककार रंजीत कपूर के काम पर रोशनी डालना चाहूंगा। मेरी जिन्दगी और काम पर उनके बड़े प्रभाव के लिये मैं उनका सम्मान करता हूँ। उनके कारण नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा में मुझे सफलता मिली। मैं उनकी मौजूदगी के बिना अपनी जिन्दगी के सफर के बारे में सोच भी नहीं सकता। उन्होंने हर उतार-चढ़ाव में मेरा साथ दिया। वह अपने निर्देशन वाले नाटकों में विभिन्न भूमिकाओं के लिये मुझे ध्यान में रखते थे। शंका के समय में उन्होंने मुझे मार्गदर्शन दिया और अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में आने का मुझे मौका दिया। उनके साथ काम करने का अनुभव सीखने के मामले में बेहतरीन था। आज मैं एक सफल एक्टर हूँ और यह सफलता अपने गुरू श्री रंजीत कपूर को समर्पित करना चाहता हूँ।’’

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