स्टार प्लस का शहज़ादी है तू दिल की लगातार दर्शकों के दिलों को छू रहा है, और इसके असर का एक बड़ा कारण आशिका पादुकोण द्वारा निभाया गया दीपा का भावुक किरदार है। दिल टूटने, ज़िम्मेदारियों और मजबूती के बीच जूझती एक मां की भूमिका निभा रहीं आशिका ने हाल ही में अपने किरदार और उसे पर्दे पर उतारते वक्त जुड़ी इमोशनल बातों को लेकर खुलकर बात की।
दीपा की मानसिक स्थिति पर बात करते हुए आशिका बताती हैं कि उनका किरदार मजबूत और आत्मनिर्भर है, लेकिन भावनात्मक सहारे की उम्मीद में वह कहीं न कहीं नाज़ुक भी है। वह कहती हैं, “दीपा आत्मनिर्भर है, लेकिन कहीं न कहीं उसे उम्मीद थी कि भानु ज़िम्मेदारी निभाएगा। जब वह उम्मीद टूटती है, तो वह उसे अंदर से तोड़ देती है। मैंने उसी विश्वासघात, निराशा और बेबसी की भावना को महसूस किया, खासकर यह जानते हुए कि वह अपनी बेटी के भविष्य के लिए यहां तक आई है,” और यही उनकी परफॉर्मेंस की भावनात्मक नींव को दर्शाता है।
आशिका आगे बताती हैं कि इस किरदार का सबसे मुश्किल हिस्सा दीपा के चुपचाप सहने वाले दर्द को दिखाना था। वह कहती हैं, “सबसे कठिन बात दीपा के मन के अंदर चल रही लड़ाई को दिखाना था। वह अंदर से बहुत आहत है, लेकिन अपनी बेटी के सामने खुद को टूटने नहीं देती। बाहर से मजबूत और संभली हुई दिखते हुए उस चुपचाप टूटते दिल को दिखाना भावनात्मक तौर पर बहुत मुश्किल था, लेकिन एक कलाकार के रूप में यह मेरे लिए बहुत असरदार अनुभव रहा।”
आशिका ने इस किरदार को सच्चा और प्रेरणादायक भी बताते हुए कहा, “व्यक्तिगत तौर पर आशिका मानती हैं कि वह दीपा की गरिमा और आत्मसम्मान से खुद को गहराई से जोड़ पाती हैं। वह कहती हैं, “मैं दीपा की मजबूती और आत्मसम्मान से खुद को जोड़ती हूं। उसकी तरह मेरा भी मानना है कि जो इंसान आपका सम्मान नहीं करता, उसके साथ टिके रहने से बेहतर है कि इंसान इज़्ज़त के साथ आगे बढ़े।”
दर्शकों के लिए क्या संदेश है, इस पर बात करते हुए वह कहती हैं, “इसकी बात बिल्कुल सीधी है, जब ज़िंदगी बहुत ज़्यादा कठिन हो जाए, तब भी आगे बढ़ते रहना चाहिए। कई बार इसका मतलब सच्चाई मान लेना, चीज़ों को छोड़ देना और हिम्मत के साथ नई शुरुआत करना होता है।”
