फिल्म समीक्षा ‘अतरंगी रे’

फिल्म ‘अतरंगी रे’ की कहानी ट्रेलर की रिलीज के समय से ही साफ है। बिहार की एक लड़की है। शादी को लेकर उसके स्वयंवर रचाने से अरमान हैं। लेकिन घरवाले उसके पैर लड़खड़ाने से पहले ही उसके हाथ पीले कर देने का फैसला कर चुके हैं। लड़का पकड़ मंगाया जाता है। ये मेडिकल की पढ़ाई कर रहा तमिलनाडु का अन्ना निकलता है। हम तुम चोरी से, बंधे इक डोरी से, जैसा कुछ गाना दोनो गा पाएं, उससे पहले ही इस डोरी की गांठ सामने आती है एक जादूगर के रूप…

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आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर की फिल्म ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ समाज को महत्पूर्ण संदेश देती है

फिल्म ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ये फिल्म देखा जाए तो आज की नई पीढ़ी से ज्यादा उन लोगों को देखनी चाहिए जो उम्र की फिफ्टी लगा चुके हैं या लगाने वाले हैं। इसके बाद ये फिल्म उन शोहदों और माताओं बहनों के लिए है जो हर दम सामने पड़ने वालों की पसंद-नापसंद को लेकर ‘जज’ बने फिरते हैं। फिल्म ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ सबसे बड़ी बात जो समझाती है वह ये कि बच्चे मां बाप की जागीर नहीं होते। बेटा हो या बेटी उसे अपनी मर्जी से अपनी पसंद की जिंदगी जीने का…

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सत्यमेव जयते 2, एक्शन के साथ दमदार फिल्म

फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ एक तरह से मनमोहन देसाई को उनकी श्रद्धांजलि है। ये एक ऐसी फिल्म है जिसमें पटकथा की तमाम गलतियां इसके नायक के शोर में गुम हो जाती हैं। फिल्म ‘सत्यमेव जयते 2’ एक ऐसी विधानसभा से शुरू होती है जहां सदन के नेता की मौजूदगी के बगैर ही एक अहम विधेयक प्रस्तुत कर दिया जाता है। बिना किसी बहस के वोटिंग होती है। बहस के बाद विधेयक प्रस्तुत करने वाले गृहमंत्री को बाद में दो मिनट बोलने को मिलते हैं। कानून बनवा पाने में नाकाम गृहमंत्री…

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मर्द की मजेदार कहानी और कॉमेडी फिल्म है ‘यह मर्द बेचारा’

एक कहानी लेकर आये हैं निर्देशक अनूप थापा, अनूप थापा की फिल्म ‘ये मर्द बेचारा’ फिल्म की कहानी शर्मा जी के बेटे शिवम शर्मा की है जो अपने पिता के खानदान की परंपरा को अपने सर पर लेकर ढ़ो रहा है।पिता जी का कहना है कि उनके खानदान में मर्द की निशानी है मूंछें।इस वजह से शिवम को मूंछ रखनी पड़ती है।मूंछ रखने के बाद मर्दानगी का पता नहीं लेकिन उसकी जिंदगी नीरस जरूर हो जाती है. कॉलेज में पसंद लड़की उससे इम्प्रेस नहीं होती और घर पर पिताजी उसकी…

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फिल्म समीक्षा : हम दो हमारे दो

फिल्म ‘हम दो हमारे दो’ की कहानी ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों जैसी है और इसका निर्देशन डेविड धवन की फिल्मों के जैसा। इसके निर्देशक अभिषेक जैन इसी उलझन में आखिर तक फंसे रहे कि आखिर उनको किस निर्देशक की कॉपी बनना है क्योंकि फिल्म में ओरीजनल जैसा कुछ है नहीं। शादी के लिए नकली माता पिता लाने का किस्सा घिस चुका है। कॉमिक बुक हीरो ध्रुव के नाम पर अपना नाम रखने वाला कहानी का नायक भी हर फ्रेम में इतना मेकअप किए रहता है कि लगता ही नहीं वह…

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फ़िल्म समीक्षा ‘हेलमेट’- हस्ते हस्ते दे गई सोशल मैसेज कॉन्डोम की कॉमेडी

निर्देशक सतराम रमानी ने छोटे शहरों में मेडिकल स्टोर से कॉन्डोम ख़रीदने की झिझक और इसे सीधा आबादी की बेकाबू रफ़्तार से जोड़ते हेलमेट बना डाली लीड रोल में लिया आयुष्मान के छोटे भाई अपारशक्ति खुराना को, मगर कमज़ोर स्क्रिप्ट और संवादों ने हेलमेट को ढेर कर दिया कहानी अनाथ लकी (अपारशक्ति खुराना) और रूपाली (प्रनूतन बहल) की है। उत्तर प्रदेश के किसी छोटे शहर में लकी एक शादी बैंड का स्टार सिंगर है। रूपाली एक अमीर और रसूख़दार शख़्स (आशीष विद्यार्थी) की बेटी है। रूपाली शादियों में डेकोरेशन का…

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फ़िल्म समीक्षा ‘चेहरे’

थिएटरों में सिनेमा की वापसी हो चुकी है और अक्सर रूमानी-कॉमिक फिल्में लिखने वाले रूमी जाफरी बतौर निर्देशक कसी हुई थ्रिलर-मिस्ट्री लाए हैं। अदालतें नाटकीयता से भरपूर होती हैं और इस फिल्म में अदालत का नाटक है, जो असल से कम नहीं लगता। न्याय की दुनिया के कुछ रिटायर्ड बूढ़े अपनी हर शाम एक घर में इकट्ठा होते हैं और वहां कोई केस बनाकर अपनी अदालत लगाते हैं। कभी-कभी उन्हें कोई व्यक्ति भी मिल जाता है, जिसके मामले पर वह अदालत जैसी जिरह कर लेते हैं और फैसले तक भी…

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फ़िल्म समीक्षा ‘बेलबॉटम’ शानदार एक्शन के साथ

अक्षय कुमार के करियर के लिए फिल्म ‘बेलबॉटम’ ऐसे मौके पर रिलीज हो रही है, जब उन्हें एक सोलो सुपरहिट फिल्म की बहुत जरूरत है और निर्देशक रंजीत ए तिवारी ने ये काम कर दिखाया है। फिल्म शुरू में थोड़ा सुस्त रफ्तार से चलती है। अलग अलग कालखंडों की कहानियां बार बार आगे पीछे होने से दर्शकों को कथानक पर पकड़ बनाए रखने में भी दिक्कत होती है। लेकिन, एक बार फिल्म का कहानी असल मुद्दे पर आती है तो फिर आखिर तक रफ्तार बनाए रखती है। हां, थोड़ा झटका…

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फ़िल्म रूही कॉमेडी और हॉरर का धमाल फ़िल्म समीक्षा

  @shahzadahmed सिनेमा संभावनाओं का तमाशा है। तमाशा ऐसा जिसको आखिरी सीन तक सुलझाए रखना बहुत जरूरी है।रूही फिल्म हंसी और डरावनेपन की खिचड़ी हैं।यानी कॉमेडी और हॉरर का घालमेल। निर्देशक की कोशिश है कि दर्शक हंसे भी और हंसने के दौरान थोड़ा डरते भी रहें और ऐसा करने में फिल्म कुछ हद तक कामयाब भी हुई है। कुछ हद तक ही। राज कुमार राव ने इसमें भवरा पांडे नाम के एक कस्बाई टीवी रिपोर्टर की भूमिका निभाई है। जो दरअसल कल्पित शहर मुजिराबाद में जो लड़कियों को जबरिया य़ानी…

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फ़िल्म समीक्षा एक शानदार एक्शन के साथ ”मलंग”

शहज़ाद अहमद मोहित सूरी की नई फिल्म मलंग की कहानी गोवा के चार ऐसे किरदारों की कहानी है एक क्रिसमस की रात उनकी जिंदगी में तूफान लेकर आती है। क्या सही है, क्या गलत है, इसका फर्क मिटता जाता है। और हर किरदार बाकी सब से बेफिक्र होकर हो जाता है, मलंग। ऐसा ही एक मलंग है अद्वैत। इतिहास उसका ज्यादा अच्छा नहीं हैं। और ऐसा ही कुछ हो रहा है सारा के साथ। दोनों दुनियादारी से दूर गोवा में गुम हो जाना चाहते हैं। इंस्पेक्टर अगाशे के लिए अद्वैत…

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