@shahzadahmed सिनेमा संभावनाओं का तमाशा है। तमाशा ऐसा जिसको आखिरी सीन तक सुलझाए रखना बहुत जरूरी है।रूही फिल्म हंसी और डरावनेपन की खिचड़ी हैं।यानी कॉमेडी और हॉरर का घालमेल। निर्देशक की कोशिश है कि दर्शक हंसे भी और हंसने के दौरान थोड़ा डरते भी रहें और ऐसा करने में फिल्म कुछ हद तक कामयाब भी हुई है। कुछ हद तक ही। राज कुमार राव ने इसमें भवरा पांडे नाम के एक कस्बाई टीवी रिपोर्टर की भूमिका निभाई है। जो दरअसल कल्पित शहर मुजिराबाद में जो लड़कियों को जबरिया य़ानी…
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