कलाकार: जुनैद खान, साईं पल्लवी,कुणाल कपूर,
निर्देशक: सुनील पांडे
निर्माता: अमीर खान, मंसूर खान,अपर्णा
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ 4/5
“वो सपने ही क्या जो पहुंच के बाहर ना हो?”— इसी लाइन के साथ फिल्म एक दिन एक ऐसे लड़के की कहानी कहती है जो खुद को कमतर समझता है और एकतरफा प्यार में जीता है।
दिनेश (जुनैद खान) एक साधारण सा लड़का है जो अपनी ही दुनिया में ‘इनविजिबल’ महसूस करता है। उसी ऑफिस में काम करने वाली मीरा (साई पल्लवी) से वह प्यार करता है, लेकिन कभी कह नहीं पाता। कहानी तब मोड़ लेती है जब जापान ट्रिप के दौरान एक हादसे के बाद मीरा अपनी एक दिन की याददाश्त खो देती है। इसी मौके का फायदा उठाकर दिनेश उसके साथ एक दिन बिताता है—लेकिन कई झूठ के सहारे।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सिंपल और मासूम लव स्टोरी है, साथ ही जापान की खूबसूरत लोकेशन विजुअल ट्रीट देती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कहानी लॉजिक से दूर जाने लगती है।
पहला हाफ ठीक-ठाक बांधकर रखता है, लेकिन सेकंड हाफ में खींचे गए इमोशंस फिल्म को भारी बना देते हैं। कई सीन ऐसे लगते हैं जहां कहानी सिर्फ लंबाई बढ़ाने के लिए आगे बढ़ रही है।
Junaid Khan ने अच्छा काम किया है, लेकिन रोमांटिक सीन्स में वह पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाते।
Sai Pallavi फिल्म की जान हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और नैचुरल एक्टिंग कई सीन में जान डाल देती है।
Kunal Kapoor अपने रोल में सटीक हैं, हालांकि स्क्रीन टाइम सीमित है।
जुनैद और साई की केमिस्ट्री कहीं अच्छी लगती है तो कहीं अधूरी, क्योंकि कहानी उन्हें पर्याप्त समय ही नहीं देती।फिल्म का टाइटल ट्रैक और अरिजीत सिंह की आवाज में ‘ख्वाब देखूं’ गाना थोड़ा असर छोड़ते हैं। बाकी गाने याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर औसत है।
एक दिन एक खूबसूरत लेकिन अधूरी फिल्म है। इसमें इमोशंस हैं, विजुअल्स हैं, लेकिन मजबूत स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमी इसे पीछे खींचती है।थिएटर में यह फिल्म थोड़ी स्लो और भारी लग सकती है, लेकिन ओटीटी पर इसे आराम से देखा जा सकता है।
अगर आप सॉफ्ट, इमोशनल लव स्टोरी पसंद करते हैं, तो एक बार देख सकते हैं।लेकिन अगर आप लॉजिक और तेज रफ्तार कहानी चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।
