वल्र्ड थिएटर डे‘ पर एण्डटीवी के कलाकारों ने बताया कि उनके ऐक्टिंग कॅरियर की नींव रखने में थिएटर ने कैसे की मदद

ऑक्सर वाइल्ड की एक उक्ति है, ‘‘मैं थिएटर को सभी कला रूपों का महानतम रूप मानता हूं, यह एक सबसे तात्कालिक तरीका है, जिसमें इंसान किसी दूसरे के साथ यह साझा कर सकता है कि इंसान होने का अहसास क्या होता है। वल्र्ड थिएटर डे या विश्व रंगमंच दिवस पर एण्डटीवी के शोज के कलाकारों, जोकि टेलीविजन ऐक्टर्स बनने से पहले रंगमंच के कलाकार थे, ने थिएटर के प्रति अपने प्यार के बारे में बात की और बताया कि उनके अभिनय कॅरियर को आकार देने में रंगमंच ने कैसे नींव तैयार की। इन कलाकारों में शामिल हैं- अनीता भाबी (विदिशा श्रीवास्तव, भाबीजी घर पर हैं), भीमराव (अथर्व, एक महानायक- डाॅ. बी. आर. आम्बेडकर), महादेव (सिद्धार्थ अरोड़ा, बाल शिव), राम प्रसाद मिश्रा (अंबरीश बाॅबी, और भई क्या चल रहा है?) और राजेश सिंह (कामना पाठक, हप्पू की उलटन पलटन)।

विदिशा श्रीवास्तव, जिन्होंने हाल ही में एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में नई अनीता भाबी के रूप में एंट्री की है, ने कहा, ‘‘विश्व रंगमंच दिवस उन लोगों के लिये एक विशेष उत्सव की तरह है, जो कला के इस रूप की कद्र करते हैं और इसकी अहमियत को समझ सकते हैं। रंगमंच कला का सबसे पुराना रूप है और समय के साथ यह काफी विकसित हुआ है। रंगमंच से सामाजिक संभाषण, संवाद और संभावित सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है और मैं खुद को सौभाग्यशाली समझती हूं कि मुझे अपने कॅरियर के शुरूआती दिनों में कुछ अद्भुत लोगों के साथ थिएटर करने का मौका मिला। बतौर कलाकार, आपको थिएटर करके जो ज्ञान हासिल होता है, वो आपके सर्वश्रेष्ठ रूप को बाहर लाने में मदद करता है।‘‘

सिद्धार्थ अरोड़ा, जोकि एण्डटीवी के ‘बाल शिव‘ में महादेव का किरदार निभा रहे हैं, ने कहा, ‘‘ऐक्टर बनने का मेरा पूरा प्रशिक्षण थिएटर के जरिये ही मिला है। वाराणसी में एक एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के वर्कशाॅप में भाग लेने के बाद, मैंने एक ऐक्टर के रूप में अपना सफर शुरू किया था। मैं जब मुंबई आया, तो एक बैंक के लिये काम करने लगा और साथ ही रंगमंच के नाटक भी किये। उसके बाद मुझे टेलीविजन इंडस्ट्री में जाने का मौका मिला, लेकिन आज भी थिएटर के लिये मेरा प्यार कम नहीं हुआ है। मैं अभी भी थिएटर करता हूं और वर्कशाॅप्स में भी भाग लेता हूं,जैसे कि मैंने हाल ही में पुड्डुचेरी में ‘आदिशक्ति‘ किया। थिएटर की वजह से ही मुझे दुनिया भर के लोगों के साथ अभिनय करने का मौका मिला। मैं अभी भी थिएटर वर्कशाॅप्स में हिस्सा लेता हूं, क्योंकि मेरा मानना है कि यदि आप एक ऐक्टर के रूप में विकसित होना चाहते हैं, तो आपको अपने अभिनय कौशल को निखारते रहना होगा। थिएटर मेरी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है।‘‘

अथर्व, यानी कि एण्डटीवी के ‘एक महानायक-डाॅ बी.आर. आम्बेडकर के युवा भीमराव ने कहा, ‘‘मैं जब साढ़े तीन साल का था तब मैंने पहली बार थिएटर किया था। मेरे माता पिता ने एक वर्कशाॅप के लिये मेरा नाम लिखवाया था। यह मंच पर मेरा पहला कदम था। मुझे यह बहुत अच्छा लगा था और थिएटर के लिये मेरा प्यार यहीं से शुरू हुआ। जल्दी ही अभिनय करना मेरा शौक बन गया और इसने मेरे लिये अवसरों के द्वार खोल दिये। इसके बाद मैंने कई वर्कशाॅप्स में भाग लिया, जिसने मेरे अभिनय कॅरियर की नींव रखी। दिलचस्प बात यह है कि थिएटर प्रोडक्शन्स के साथ काम करना हमें जिंदगी के कई कौशल सिखाता है। यह आपके मौखिक संवाद और समस्या सुलझाने के कौशल को बेहतर बनाता है, ढेर सारे लोगों के सामने बोलने का आत्मविश्वास पैदा करता है और तनाव में तथा आत्मनिर्भरता के साथ काम करने का हुनर सिखाता है। मैं थिएटर की बहुत इज्जत करता हूं, जिसने मुझे एक बेहतर ऐक्टर बनने में मदद की। इसी की बदौलत मुझे एण्डटीवी के ‘एक महानायक-डाॅ बी.आर. आम्बेडकर‘ में युवा भीमराव का किरदार निभाने का यह बेहतरीन मौका मिला और मुझे लगता है कि जिंदगी में ऐसे मौके बार-बार नहीं आते।‘‘

अंबरीश बाॅबी, जोकि एण्डटीवी के ‘और भई क्या चल रहा है?‘ में रमेश प्रसाद मिश्रा का किरदार निभा रहे हैं, ने कहा, ‘‘एक रेगुलर मिडल-क्लास फैमिली से होने के कारण, मैंने एक काॅमर्स एवं अकाउंटिंग ग्रेजुएट के रूप में मेरी पढ़ाई पूरी की और एक अकाउंटेंट के रूप में कई कंपनियों के साथ काम किया। एक आॅफिस में काम करने के दौरान मेरी मुलाकात एक लाइफ इंश्योरेंस एजेंट से हुई, जो नाटकों में काम करता था। उसने मुझे एक ड्रामा रिहर्सल में बुलाया। एक थिएटर आर्टिस्ट के रूप में मेरा सफर यहीं से शुरू हुआ। उसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और लखनऊ के मशहूर थिएटर डायरेक्टर्स जैसे कि संगम बहुगुणा, ललित सिंह पोखरिया और राजा अवस्थी आदि के साथ काम किया। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह थिएटर की वजह से ही है और इसलिये मेरे दिल में थिएटर की एक खास जगह है। एक ऐक्टर के रूप में मैंने जो कुछ भी सीखा है, वह थिएटर से ही सीखा है। बतौर कलाकार, आप रंगमंच से तौर-तरीके सीखते हैं, जिससे आपकी शख्सियत निखरती है और आपको खुद को दूसरों के सामने व्यक्त करना सिखाती है, विनम्र बनाती है और यह भी बताती है कि किस चीज पर आपकी प्रतिक्रिया किस तरह की होनी चाहिये। रंगमंच में एक व्यक्ति को एक कलाकार बनाने की शक्ति होती है।‘‘

कामना पाठक, यानी कि एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश ने कहा, ‘‘मैंने पांच साल की उम्र में मेरा पहला स्टेज शो किया था और थिएटर में मेरा सफर यहीं से शुरू हुआ। थिएटर ने मुझे कई बहुमूल्य पाठ सिखाये हैं, जिसने एक बेहतर ऐक्टर बनने में मेरी मदद की और इसी ने मुझे मनोरंजन उद्योग में सफल होने का आत्मविश्वास भी दिया। थिएटर के साथ मेरे सफर के दौरान मैंने कुछ दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया, जैसे कि एम. एस. सथयु, सौरभ शुक्ला, मनोज जोशी, हेमा सिंह और अन्य। थिएटर के दिनों में मैंने बहुत कुछ सीखा, लेकिन जो सबसे अच्छी बात मैंने सीखी वह है ‘द शो मस्ट गो ऑन‘, फिर चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, एक बार शो शुरू हो गया, तो उसे आगे बढ़ना ही होगा। थिएटर में कोई दूसरा मौका नहीं मिलता, क्योंकि इसमें रिटेक्स नहीं होते। सिनेमा और टेलीविजन निर्देशित माध्यम होते हैं, जबकि थिएटर एक ऐक्टर का माध्यम है। एक बार यदि नाटक शुरू हो जाता है, तो फिर आपको निर्देशित करने वाला कोई नहीं होता। यदि आपसे कोई छोटी सी गलती भी हो जाती है, तो आपको ही उसे कवर अप करना होता है। मेरा मानना है कि थिएटर महारत हासिल करने का सबसे मुश्किल माध्यम है, क्योंकि यह आपको दर्शकों के साथ प्रत्यक्ष तौर पर संवाद करने और तत्काल प्रतिसाद पाने में सक्षम बनाता है, जिससे एक ऐक्टर के रूप में आपको आत्मविश्वास मिलता है। एक कलाकार बनने के मेरे सफर में थिएटर ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मैं थिएटर को बहुत मिस करती हूं, लेकिन भविष्य में यदि मुझे समय मिला, तो मंच पर दोबारा कदम रखकर और कुछ महान शोज करके मुझे बेहद खुशी होगी।‘‘

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