बॉलीवुड के किंग खान शाहरूख खान कहते है ‘जवान’ एक ऐसी फिल्म है, जो सीधे दिल में उतरती है – इस फिल्म में जज़्बात हैं, अपनापन है, जबर्दस्त ड्रामा और तूफानी एक्शन है

ज़ी सिनेमा पर होने जा रहा है हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी हिट ‘जवान’ का वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर, 28 जनवरी को

“टेलीविजन पर अपनी फिल्म का प्रीमियर देखना हमेशा अच्छा लगता है। हम सभी ने इस फिल्म में अपना दिल लगाया है और यह बहुत अच्छी बात है कि अब  ज़ी सिनेमा के जरिए ये फिल्म देश भर के घरों तक पहुंच रही है। फिल्म मेकिंग का एक जॉनर ऐसा है जो डायनैमिक है, विशाल है… ज़िंदगी से भी बड़ा। यह एक फिल्म में पैक की गई हर चीज की एक रोलरकोस्टर राइड है और यह वाकई एक मजेदार, सार्थक सफर है। ‘जवान’ आपको सोचने पर मजबूर कर देगी, आपको गुस्सा दिलाएगी, आपको हंसाएगी और रुलाएगी, और आपको इससे प्यार हो जाएगा, लेकिन यह अपने परिवार के साथ अनुभव करने लायक सफर होगा।”

जवान के बारे में कुछ बताएं? यह फिल्म आपके लिए क्या मायने रखती है?

जवान मेरे दिल में एक खास जगह रखती है। अच्छी तरह से बुनी गई कहानी, कलाकार, निर्देशन, संगीत, संदेश, यह सब मजबूती से जुड़े हुए थे। लेकिन फिल्म सिर्फ तकनीकी बारीकियों से कहीं ज्यादा है, यह एक ऐसी कहानी है जो वाकई आपके दिल पर असर करती है। यह अपनी-सी लगती है और इसमें एक भावनात्मक जुड़ाव है जो इंसानी जज़्बातों के साथ गहराई से जुड़ती है।

फिल्म में आप अलग-अलग लुक्स में नजर आए – यंग, बूढ़ा, गंजा आदि। यह अनुभव कैसा रहा?

इतने सारे अलग-अलग वैरिएशन्स को शामिल करना एक अनोखी पहल थी, और हमने सोचा कि ये सभी खूबियां दिलचस्पी जगाएंगी। इस कहानी ने हमें लुक्स के साथ प्रयोग करने का मौका दिया। यह मेरे लिए भी पहली बार था, और ये फिल्म का एक रोमांचक हिस्सा था। हर लुक कहानी को आगे बढ़ाने में मददगार था। और ईमानदारी से कहूं तो, हमने गंजा लुक इसलिए चुना क्योंकि मैं 2 घंटे तक बालों और मेकअप में बैठने को लेकर आलसी था।

आप दिल से जवान कैसे बने रहते हैं? और ज़िंदगी में भी?

दिल से जवान, दिल से खुश रहने का एकमात्र तरीका दिल से पाक-साफ होना है। ऐसा करने का एकमात्र तरीका यह है कि आप लोगों के प्रति और जो काम आप कर रहे हैं, उसके प्रति संदेह न रखें। अपने आसपास के लोगों के लिए सबसे अच्छा और सर्वोच्च सम्मान रखें, अपने परिवार और दोस्तों से प्यार करें और दयालु बनें। मेरा मानना है कि दिल से जवान बने रहने के लिए बस थोड़ी-सी कोशिश की जरूरत होती है।

क्या आप ‘जवान’ को लेकर और अपने हिंदी फिल्म करियर में पहली बार निर्देशक एटली के साथ काम करने का अपना अनुभव बता सकते हैं?

एटली के साथ साझेदारी करना सिर्फ एक स्क्रिप्ट पर काम करने के बारे में नहीं था; यह किरदारों और कहानी कहने की आपसी खोज थी। एटली के नजरिए की स्पष्टता और चीजों को समझने की उनकी काबिलियत वाकई काबिले तारीफ है। मैं वाकई उनकी निर्देशन शैली की सराहना करता हूं। वो विशाल, साहसी, ज़िंदगी से भी बड़े हैं – वो एटली हैं!

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