टेलीविजन मनोरंजन का सदाबहार माध्यम है

मनोरंजन के कई साधनों के आने के बावजूद टीवी मनोरंजन के माध्यम के तौर पर भारत के ज्यादातर घरों पर राज कर रहा है। वल्र्ड टेलीविजन डे के मौके पर एण्डटीवी के ऐक्टर्स ने टेलीविजन से मिलने वाले मनोरंजन और अपनी मजेदार यादों/घटनाओं पर बात की। ये ऐक्टर्स हैं- नेहा जोशी (यशोदा, ‘दूसरी माँ’), हिमानी शिवपुरी (कटोरी अम्मा, ‘हप्पू की उलटन पलटन’) और आसिफ शेख (विभूति नारायण मिश्रा, ‘भाबीजी घर पर हैं’)। एण्डटीवी के शो ‘दूसरी माँ‘ में यशोदा बनीं नेहा जोशी ने कहा, ‘‘मैंने थियेटर से शुरूआत की और फिर मैंने टीवी और फिल्मों में काम किया, लेकिन मेरे दिल में टेलीविजन की एक खास जगह है। मेरा मानना है कि यह मनोरंजन के सबसे महत्वपूर्ण माध्यमों में से एक है और आगे भी बना रहेगा। एक वक्त था, जब मेरी जिन्दगी टेलीविजन और मेरे पसंदीदा शोज के इर्द-गिर्द ही घूमती थी। मैं अपना सारा काम पूरा करने के बाद मेरे पसंदीदा टीवी प्रोग्राम्स देखने बैठ जाती थी। मैं मराठी और हिंदी सीरियल्स के साथ ही सिंगिंग रियलिटी शोज भी देखती थी। टेलीविजन उद्योग काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि आपको अपनी पूरी मेहनत के साथ हर दिन परफाॅर्म करना होता है। क्योंकि आपको हर रोज कैमरा का सामना करना पड़ता है, इसलिए यह चुनौती आपको सीखने के कई मौके प्रदान करती है। मेरा मानना है कि ज़ीरो से शुरूआत करने वाले कलाकार के लिये टेलीविजन सबसे बड़ा माध्यम है, जो उन्हें शोहरत दिला सकता है। मैं अक्सर कहती हूं कि ‘‘टीवी एक स्कूल है जहां आपको जहां आपको पैसा भी मिलता है‘‘। टेलीविजन हर कलाकार को रोजाना अपने दर्शकों से जुड़ने का मौका देता है, यह दुनिया के हर कोने में पहुँचता है। यह अच्छा है कि कई भारतीय टीवी शोज डब होकर विभिन्न देशों में टीवी पर प्रसारित हो रहे हैं। मैं वल्र्ड टेलीविजन डे पर कड़ी मेहनत करते रहने और टेलीविजन के जरिये अपने प्रशंसकों तक पहुँचने का वादा करती हूँ।’’

एण्डटीवी के शो ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में कटोरी अम्मा बनीं हिमानी शिवपुरी ने कहा, ‘‘स्क्रीन के साइज बदल चुके हैं, लोग विभिन्न प्लेटफाॅम्र्स पर कंटेन्ट बनाते हैं, उसे पोस्ट करते हैं, स्ट्रीम करते हैं और  कंज्यूम करते हैं, फिर भी कुछ समर्पित प्रशंसक टेलीविजन पर अपने चहेते सितारों को नियमित तौर पर देखते ही हैं। जब मेरे पति की आकस्मिक मौत हुई, तब मैंने एक्टिंग छोड़ने पर गंभीरता से विचार किया था। उस वक्त टेलीविजन की उन्नति हो रही थी और कई नये चैनल लाॅन्च हुए, और संघर्ष कर रहे कलाकारों के लिये अचानक से मौकों का एक दरवाजा खुल गया। मुझे मेन लीड के तौर पर टीवी शोज के कई आॅफर्स मिलने लगे, जिनमें से कुछ को मैंने स्वीकारा और इस तरह में एक जाना-पहचाना नाम बन गई। एक माध्यम के तौर पर टीवी ने मेरी मदद तब की, जब मेरे हालात सबसे बुरे थे और मैंएक कलाकार के तौर पर मुझे स्वीकार करने के लिये भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री की हमेशा आभारी रहूंगी। शो बिजनेस की दुनिया में थियेटर ने मुझे संतुष्टि दी, फिल्मों ने नाम और शोहरत दी और टेलीविजन ने स्थायी आमदनी दी। मैं मनोरंजन के हर माध्यम की हमेशा आभारी हूँ।’’ एण्डटीवी के शो ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में विभूति नारायण मिश्रा की भूमिका निभा रहे आसिफ शेख ने कहा, ‘‘मेरे मन में कई तरह की भावनाएं थीं, जब मैंने 1984 में पहली बार खुद को टेलीविजन पर देखा था। मैं चिंता में था, खुश और रोमांचित भी था और सबसे महत्वपूर्ण, यह सोचकर नर्वस था कि मेरा परिवार और दोस्त कैसे रियेक्ट करेंगे। बेशक उसके बाद मुझे फिल्में मिलने के साथ ही शोहरत भी मिली, लेकिन टेलीविजन हमेशा मुझे प्यारा रहेगा और मेरी साधारण शुरूआत की याद दिलाएगा। यह सच है कि टीवी पर काम करना थकाने वाला और नियमित हो जाता है, लेकिन यह हर तरीके से लंबे समय तक काम आता है। एक एक्टर के तौर पर मैं छोटे पर्दे का आभारी हूँ, क्योंकि उसी के कारण पिछले तीन दशकों से अपने दर्शकों को हंसा पा रहा हूँ और अभी बहुत कुछ बाकी है। ‘भाबीजी घर पर हैं’ के इन सात सालों में मैंने 300 से ज्यादा किरदार किये हैं, जोकि छोटे पर्दे पर काम कर रहे एक एक्टर के लिये बड़ी उपलब्धि है। टेलीविजन के साथ मेरे रिश्ते की किसी से तुलना ही नहीं हो सकती और ज्यादा से ज्यादा काम करने के लिये मेरा रोमांच और उत्सुकता रोजाना बढ़ रही है। क्योंकि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।’’

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