टीवी सितारे रंगों से भरे त्यौहार होली में रंगने के लिये तैयार!

होली का त्यौहार बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। यह बसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। इसमें लोग मिलकर जीवन के रंगों का उत्सव मनाते और आनंद लेते हैं। इस त्यौहार को लेकर भारत के हर राज्य का अपना एक अनोखापन होता है। ऐसे में संस्कृतियों और  परंपराओं का एक विविधतापूर्ण संगम बन जाता है। उत्सव मनाने के विभिन्न तरीकों पर बात करते हुए, एण्डटीवी के कलाकारों ने अपने-अपने होमटाउन में होली की अनूठी परंपराओं के बारे में बताया। इन कलाकारों में शामिल हैं-  ‘अटल‘ के और व्योम ठक्कर (नन्हा अटल), ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की चारुल मलिक (रुसा) और ‘भाबीजी घर पर हैं‘ के सानंद वर्मा (अनोखेलाल सक्सेना) और वैभव माथुर (टीका)।

गुजरात के होली उत्सव पर जानकारी देते हुए, एण्डटीवी के शो ‘अटल‘ में नन्हे अटल की भूमिका निभा रहे व्योम ठक्कर ने कहा, ‘‘गुजरात में होली का त्यौहार बड़ी खुशी से दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन की शाम को लोग अलाव जलाते हैं और उसकी आग में कच्चा नारियल और मक्का डालते हैं। दूसरे दिन को धुलेटी कहा जाता है, जब रंगों से भरा त्यौहार मनाया जाता है। इस दौरान लोग मजेदार तरीके से एक-दूसरे पर रंगीन पानी डालते और रंग लगाते हैं। मशहूर तटीय शहर द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर में संगीत और काॅमेडी के साथ होली मनाई जाती है। अहमदाबाद में एक अनोखी परंपरा है, जिसमें गलियों पर छाछ का एक बर्तन टांगा जाता है। नये लड़के मानव पिरामिड बनाकर उन्हें तोड़ते हैं, जबकि लड़कियाँ रंगीन पानी की बौछारों से उन्हें रोकने की कोषिष करती हैं। कुछ संयुक्त हिन्दु परिवारों में एक मजेदार परंपरा होती है। इसमें महिलाएं साड़ियों का रोल बनाकर अपने जीजा को पीटती हैं, अगर वे उन पर रंग लगाने की कोषिष करते हैं। इसके बाद सद्भावना के प्रयास में वे एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। त्यौहार पूरे उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जाता है। गुजरात के कुछ हिस्सों में लोग पारंपरिक नृत्य करते हैं, जैसे कि गरबा और डांडिया रास। इससे उत्सव में सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का भाव आता है। गुजरात में होली रंगों का त्यौहार होती है और वह एकजुट होने का समय होता है। इसमें आनंद लिया जाता है और खुशियाँ फैलाई जाती हैं। मैं सभी को एक खुशहाल और रंगीन होली की शुभकामना देता हूँ!’’

एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की रूसा यानी चारुल मलिक ने पंजाब में त्यौहार के बारे में बताते हुए कहा, ‘‘पंजाब में, होली बड़े ही उत्साह एवं जोश के साथ मनाई जाती है, इस त्यौहार पर राज्य के जीवंत जोश की झलक मिलती है। त्यौहार को ‘होला मोहल्ला‘ नाम से भी जाना जाता है, और सिखों के बीच इसका खासा महत्व है जोकि इस त्यौहार को पारंपरिक जोश एवं मार्शल आटर््स का प्रदर्शन कर मनाते हैं। होला मोहल्ला होली के हिंदू त्यौहार के एक दिन बाद मनाया जाता है और इसमें आध्यात्मिकता एवं साहस का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। त्यौहार अमूमन गुरूद्वारा में प्रार्थनाओं एवं कीर्तन के साथ शुरू होता है, इसके बाद गली-गली जाकर ‘नगर कीर्तन‘ किया जाता है। प्रतिभागी विभिन्न शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, जिसमें अपनी ताकत एवं साहस दिखाने के लिए माॅक बैटल्स और कुश्ती के मैच शामिल हैं। म्यूजिक और डांस भी सेलेब्रेशन का अभिन्न हिस्सा हैं, लोगों को भांगड़ा का लाइव परफाॅर्मेंस देखने को मिलता है जिससे चारों ओर त्यौहारी माहौल नजर आता है। परिवार एवं दोस्तों के साथ ‘फिरनी‘, ‘मालपुआ‘ और ‘गुझिया‘ जैसी पारंपरिक पंजाबी मिठाईयों का आनंद उठाया जाता है और इससे भाईचारे एवं एकता की भावना मजबूत होती है। पंजाब में होला मोहल्ला एक ऐसा त्यौहार है जिसमें साहस, सामुदायिक जोश और सांस्कृतिक धरोहर का जश्न मनाया जाता है। इस त्यौहार को मनाने से मेरा दिल खुशियों से भर जाता है, मेरी तरफ से सभी को होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें।‘‘

बिहार में त्यौहार के बारे में बताते हुए एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अनोखे लाल सक्सेना का किरदार निभा रहे सानंद वर्मा, ने कहा, ‘‘बिहार में होली का त्यौहार बहुत भव्य एवं शानदार होता है। इस क्षेत्र में होली को ‘फागुन‘ नाम से जाना जाता है जोकि भारत में बिहार के लोकगीतों की लोकप्रियता का प्रतीक है। फागुन पूर्णिमा की संध्या पर, लोग होलिका दहन करते हैं ताकि खुद को समस्याओं एवं दुष्ट आत्माओं से बचाया जा सके। वे अपने शरीर पर सरसों और तेल का उबटन भी लगाते हैं। उनका मानना है कि इससे उनका शरीर साफ होता है। इसके बाद, वे इस मिश्रण को होलिका दहन की आग में डालते हैं, ऐसा माना जाता है कि इससे सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं। बिहार में होली लड़ाई-झगड़ों के खत्म होने और रंगबिरंगे उत्सव के जरिये दोस्ती को बढ़ावा देने का समय है। ये त्यौहार आमतौर पर दो दिन मनाया जाता है। हर घर में दही भल्ले, मालपुआ और कचैड़ी जैसे स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं।  इसके अलावा, लोग मिठाईयों के साथ ही भांग एवं ठंडाई का भी लुत्फ उठाते हैं। सभी लोग रंगों, पानी से भरे गुब्बारों से होली खेलते हैं और लोकगीत गाते हैं। मैं हमेशा अपने होम टाउन में होली मनाने का इंतजार करता हूं और खुशियों से भरे इस त्यौहार पर वहां जाने की कोशिश करता हूं। मेरी तरफ से सभी को खुशियों से भरी सुरक्षित होली की शुभकामनायें।‘‘ एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ में टीका का किरदार निभा रहे वैभव माथुर ने दिल्ली में उत्सव के बारे में कहा, ‘‘मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, तो मुझे पता है कि इस शहर में संस्कृतियों एवं परंपराओं की बहार है। होली के त्यौहार का दिल्ली में काफी महत्व है और यह अमूमन ‘तिलक‘ लगाने की परंपरा के साथ शुरू होता है जहां लोग अपने माथे पर रंगों का टीका लगाते हैं जोकि आदर और आत्मविश्वास का प्रतीक है। दिल्ली में होली जबर्दस्त उत्साह और खुशियों के साथ मनाया जाता है, रंगों के इस त्यौहार को मनाने के लिए सभी लोग एकजुट होते हैं। इस उत्सव की शुरूआत होली की संध्या पर होलिका दहन के साथ होती है जोकि बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाता है। होली वाले दिन, शहर लोगों की हंसी, संगीत और हो-हल्ला से सराबोर हो जाता है, सभी लोग रंगों से होली खेलने के लिए अपने घर से बाहर निकलकर गलियों में आ जाते हैं। होली के दौरान शहर में खूब पार्टियां होती हैं, जहां लोगों के समूह बड़े ही आनंद से एक-दूसरे के तब तक रंग लगाते हैं, जब तक कि उन्हें पहचानना मुश्किल ना हो जाए।  चारों ओर मस्ती का माहौल होता है और लोग रंगों से खेलते हैं, अपने परिवारों के साथ घर के करीब रहते हैं। दिल्ली में होली मनाना हमेशा से ही एक असाधारण अनुभव रहा है, और मैं इस साल भी त्यौहार मनाने के लिए तैयार हूं। सभी को होली की शुभकामनायें। खुश रहें, सुरक्षित रहें!‘‘

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