एण्डटीवी के कलाकारों ने बताया, ‘‘यदि वे ऐक्टर नहीं होते, तो क्या होते?‘‘

एण्डटीवी के कलाकार, जिन्होंने बीते सालों में अपने बेमिसाल अभिनय से अपने प्रशंसकों का दिल जीता है, ने अपने कॅरियर की पसंद को लेकर कुछ दिलचस्प बातों का खुलासा किया। इन कलाकारों में शामिल हैं- आसिफ शेख (‘भाबीजी घर पर हैं‘ के विभूति नारायण मिश्रा), दानिश अख्तर सैफी (‘बाल शिव‘ के नंदी), योगेश त्रिपाठी (‘हप्पू की उलटन पलटन‘ के दरोगा हप्पू सिंह) और पवन सिंह (‘और भई क्या चल रहा है?‘ के जफर अली मिर्जा)।

दानिश अख्तर सैफी ऊर्फ एण्डटीवी के ‘बाल शिव‘ के नंदी ने कहा, ‘‘अपना ऐक्टिंग कॅरियर शुरू करने से पहले मैं रेसलिंग चैम्पियनशिप के लिये द ग्रेट खली से ट्रेनिंग लिया करता था। मुझे ड्ब्ल्यूड्ब्ल्यूई में मुकाबला करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय पहलवान बहुत पसंद थे और मैं उनके जैसा बनना चाहता था। मैंने जब अपने पापा को बताया कि मैं पहलवानी करना चाहता हूं, तो उन्होंने मुझे सालों तक गहन प्रशिक्षण दिलवाया और मेरी दिनचर्या एवं खान-पान को लेकर बेहद सख्त रहे। हालांकि, उस समय संयोग से मैं अभिनय करने लग गया, जब मैं एक आॅडिशन के लिये गया और मेरी बाॅडी की वजह से मुझे हनुमान का किरदार निभाने के लिये चुन लिया गया। ‘बाल शिव‘ में नंदी का किरदार निभाकर मुझे बतौर ऐक्टर पहचान मिल गई। मुझे अब खुद को परदे पर देखना अच्छा लगता है। और मैं आमतौर पर लोगों से कहता हूं कि पहलवानी मेरा पहला प्यार था और अभिनय मेरा आखिरी प्यार है (हंसते हैं)।‘‘

पवन सिंह ऊर्फ एण्डटीवी के ‘और भई क्या चल रहा है?‘ के जफर अली मिर्जा ने कहा, ‘‘बचपन में मैं रंगों और कल्पनाओं की दुनिया में रहा करता था। आर्ट्स में मुझे हमेशा से ही दिलचस्पी थी और मुझे इसके लिये कई पुरस्कार भी मिले हैं। अपने हाथों में कलर पैलेट और ब्रश लेकर मैं खुद को ऊर्जा से भरपूर और काफी खुश महसूस करता था। मुझे सभी लोगों ने पेंटिंग को अपना कॅरियर बनाने के लिये प्रोत्साहित किया लेकिन मेरा मानना है कि पेंटिंग मेरे लिये अपने तनाव को दूर करने का एक तरीका है। मैंने पहले कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐक्टिंग में अपना कॅरियर बनाऊंगा। हालांकि, मेरे एक दोस्त ने मुझे सुझाव दिया कि मैं अभिनय में अपना हाथ आजमाऊं, क्योंकि मेरा लुक अच्छा है। उसके कहने पर मैंने एक आॅडिशन दिया और मुझे चुन लिया गया। तब से लेकर अब तक मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसलिये यदि मैं ऐक्टर नहीं होता, तो एक पेंटर बनता।‘‘

योगेश त्रिपाठी ऊर्फ एण्डटीवी के ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ के दरोगा हप्पू सिंह ने कहा, ‘‘मेरे खानदान में अधिकतर लोग शिक्षा के क्षेत्र काम कर रहे हैं और स्कूल टीचर्स हैं। इसलिये यदि मैं ऐक्टर नहीं होता, तो टीचर बनता, क्योंकि टीचिंग मेरे खून में है। मेरे परिवार वाले हमेशा चाहते थे कि मैं टीचिंग प्रोफेशन को अपनाऊं, जो सबसे सम्मानजनक नौकरियों में से एक है, लेकिन मेरा झुकाव ऐक्टिंग और थिएटर की ओर ज्यादा था। मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरे परिवार ने मुझे उस कॅरियर को चुनने में सपोर्ट किया, जो मैं चाहता था और मेरे संघर्ष के दिनों में वे सब मुझे प्रेरित करते रहे। मैं अपने परिवार में इकलौता ऐसा शख्स हूं, जिसने बतौर ऐक्टर अपना कॅरियर बनाया है। मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने उन्हें निराश नहीं किया है और मैं एन्टरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने पांव जमाने में कामयाब रहा हूं।‘‘

आसिफ शेख ऊर्फ एण्डटीवी के ‘भाबीजी घर पर हैं‘ के विभूति नारायण मिश्रा ने कहा, ‘‘ऐक्टर बनने का मेरा कोई इरादा नहीं था। मैं हमेशा से ही क्रिकेट खेलना चाहता था। मेरे पिता भारतीय रेलवे में काम करते थे और हम जहां पर रहते थे, वहां पर मेरे घर के सामने एक बड़ा सा क्रिकेट का मैदान था। मैंने वहीं पर पहली बार क्रिकेट खेलना सीखा। मैं जब छठी क्लास में था, तो क्रिकेट को लेकर मेरी दिलचस्पी और बढ़ गई। हालांकि, मैंने क्रिकेट में कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ली थी, लेकिन फिर भी हाई स्कूल लेवल पर कई ट्राॅफियां और चैम्पियनशिप्स जीते। मैंने अपने स्कूल की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर भी मुकाबला किया। यदि अभिनय के क्षेत्र में मुझे काम नहीं मिलता था, तो इस बात की पूरी संभावना है कि मैं क्रिकेट को अपना कॅरियर बनाता। खुशकिस्मती से मेरा जन्म ऐक्टर बनने के लिये हुआ था और घंटों यात्रा करने एवं शूटिंग के बावजूद मैं जब भी संभव होता है क्रिकेट खेलने के लिये समय निकाल ही लेता हूं। इससे मुझे बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है। अब जबकि मैं एक फुल टाइम ऐक्टर हूं, मुझे इस बात की खुशी है कि मैं सालों से अपने दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर रहा हूं।‘‘

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