एक्टर सुमीत राघवन ने काम और जिन्‍दगी के बीच संतुलन बनाये रखने के बारे में कही यह बात

सोनी सब के शो ‘वागले की दुनिया- नई पीढ़ी नये किस्‍से’ ने प्रासंगिक और दिलचस्‍प कहानी से विभिन्‍न पीढ़ियों का दिल जीता है और यह शो अपने दर्शकों के लिये प्रभावी कंटेन्‍ट डिलीवर करने के नये-नये तरीके आजमा रहा है। राजेश (सुमीत राघवन) की कंपनी का मर्जर हो गया है और तब से उनकी जिन्‍दगी ही बदल गई है। अत्‍यंत तनावपूर्ण माहौल में काम करने से वह काफी थक जाते हैं और इस दबाव का संकेत उनकी सेहत भी दे रही है। राजेश अपनी निजी और पेशेवर जिन्‍दगी के बीच ताल-मेल बिठाने की लगातार कोशिश कर रहा है। यह उसकी जिन्‍दगी के सबसे चुनौतीपूर्ण पड़ावों में से एक है।

सुमीत राघवन ने बताया कि काम और जिन्‍दगी के बीच संतुलन रखना कितना महत्‍वपूर्ण है और वह इसका ध्‍यान कैसे रखते हैं।

सही संतुलन कैसे पाएं, इस पर सुमीत राघवन ने कहा, “मैं सोचता हूँ कि आपको अपनी जिन्‍दगी और परिवार के लिये समय निकालना चाहिये, क्‍योंकि मैंने हमेशा यही किया है। कोई एक शौक रखना जरूरी है। इससे भी महत्‍वपूर्ण है कुछ ऐसा, जो आपको अपने मोबाइल फोन से राहत दे। संगीत निश्चित तौर पर जादुई है और मेरे लिये बेस्‍ट थेरैपी भी। मैं अपने हारमोनियम को मेक-अप रूप में हमेशा अपने साथ रखता हूँ, क्‍योंकि वह शांत रहने और तरोताजा होने में मेरी मदद करता है। मेरे लिये घर का मतलब हमेशा से अपने परिवार, बच्‍चों और पालतू जानवरों के साथ समय बिताने से रहा है। 2020 में मैंने अपनी पूरी एनर्जी को अपने परिवार पर फोकस कर दिया था। मेरे दोनों बच्‍चे बड़े हो चुके हैं और उनकी अपनी जिन्‍दगी है। मेरी पत्‍नी एक्‍टर हैं और उनका पेशा मेरी तरह होना मेरा सौभाग्‍य है। हम अपने वर्क शेड्यूल्‍स जानते हैं और इसका फायदा होता है। मैं सोचता हूँ कि मानसिक रूप से स्थिर और शांत रहना महत्‍वपूर्ण है। आखिरकार, आपको खुश रहने की जरूरत है और यही सारे तालों की चाबी है।”

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के महत्‍व पर सुमीत राघवन ने कहा, “मैंने हमेशा माना है कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सबसे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है। शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिये आप जिम जा सकते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिये आप क्‍या करते हैं? मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को अच्‍छा बनाये रखने के लिये आपको सही पोषण चाहिये। आपका अच्‍छी संगत में रहना जरूरी है। आपको बात करनी चाहिये और अपने आस-पास ऐसे लोग चाहिये, जिनके साथ आप बिना संकोच के बात कर सकें और अपने विचार रख सकें। ऐसे लोग, जो आपको सुनें और आपके लिये खड़े हों। मैं सोचता हूँ कि परिवार और करीबी दोस्‍त हमेशा ऐसे लोग होते हैं, जिनके पास आप किसी भी मदद के लिये जा सकते हैं।”

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